प्रा. यशवंतराव केलकर स्मृति दिवस

यशवंतराव जी के बिना विद्यार्थी परिषद इस स्थिति को अब काफी वर्ष गुजर चुके है। वे कहते थे संगठन कार्य में हर एक का अपना स्थान होता अवश्य हे, किन्तु कोई भी कभी अपरिहार्य नहीँ होता। किन्तु उनके स्वयं के संबंध में यह बात गले नहीँ उतरती। हम सब के केवल व्यक्तिगत ही नहीँ अपितु सार्वजनिक जीवन के हर्ष - खेद से वे इस प्रकार घुलमिल गए थे कि उनके साथ बातचीत करने से अपना हर्ष दुगना और खेद लगभग समाप्त हो जाता था। 
भव्य एवम उच्चत्तम सपने संजोने वाले प्रायः सभी व्यक्ति सहजता से सुसंवाद प्राथपित करने को प्रस्तुत नहीँ होते, किन्तु यशवंतराव जी ने स्वयं तो सपने संजोये ही, साथ - साथ दूसरोँ को भी दिव्य दृष्टि प्रदान की, जिस से वह भी दिव्य सपनों को ह्रदय मेँ लेकर मार्गक्रमण करता गया। 
यशवंतराव जी ने पद एवं प्रसिद्धि की चकाचौन्ध से दूर रहते हुए राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के कार्य में नींव के पत्थर की भूमिका अक्षरशः निभायी। सार्वजनिक जीवन मेँ व्यक्ति जितना छोटा होता हे उसकी उतनी ही बड़ी छबि निर्माण करने का प्रयास वह स्वयं अथवा उसके साथी करते है। जो सचमुच बड़े होते है, वे छबि बनाने का यत्न नहीँ करते। केलकर जी भी ऐसे महान व्यक्ति थे जिन्होंने छबि बनाने के बजाय राष्ट्र समर्पित जीवन जीने का मार्ग अपनाया तथा संपर्क मेँ आने वाले अनेक कार्यकर्ताओँ को उस मार्ग पर प्रवृत्त किया। 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से अनेक राष्ट्र समर्पित निःस्वार्थी सामाजिक कार्यकर्ताओं का उन्होंने निर्माण किया। विद्यार्थी परिषद को एक छोटे पौंधे से बढ़ाकर विशाल वटवृक्ष बनाने मेँ उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। ऐसे प्रेरणापुंज को आज स्मृति दिवस पर शत -शत नमन।

Date: 
Dec07